भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता को विशेष स्थान प्राप्त है। यह…
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भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता को विशेष स्थान प्राप्त है। यही भाव श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन, यानी श्राद्ध पूर्णिमा (जिसे आश्विन पूर्णिमा या पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है) में सर्वोच्च रूप से प्रकट होता है। अश्विन मास की यह पूर्णिमा हिन्दू पंचांग के अनुसार वह तिथि है, जब पितृपक्ष का समापन होता है और समूचे भारत में पुरखों के प्रति श्रद्धा, तर्पण, हवन, पूजन, दान और भजन की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन की आध्यात्मिक, सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त गूढ़ माया और भावनात्मक महत्ता है।